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Showing posts from June, 2023

जब मैं नहीं रहूंगा

 जब मैं नहीं रहूंगा, तब तुम क्या करोगे, मेरी ख्वाहिशों को अपने दिल में छोड़ोगे ? मेरी आवाज़ सुनने को तरसोगे ? या मेरी यादों में खो जाओगे ? जब मैं नहीं रहूंगा, तब तुम क्या सोचोगे ? मेरे बिना जीने की कठिनाईयों से जूझोगे ? मेरी कमी को महसूस करोगे ? या मेरे ख्वाबों को देखकर अचंभित होंगे ? जब मैं नहीं रहूंगा, तब तुम क्या जी पाओगे ? मेरे साथ बिताए हर पल को याद करोगे ? या मेरी तरह मुस्काने छिपाओगे ? क्यों तुम मुझे याद करोगे ? ये दिल पूछता है, हम रहे या न रहे,क्या फर्क पड़ता है। तेरे लिए एक अनजान हूँ मै,  जब भी तू मेरे ख्यालों में हो, याद करके रोऊँगा।

ये झुल्फें

 ये झुल्फें, ये बादली सी बिखरी हुई हैं, तुम्हारे चेहरे को छूने को बेकरार हैं। इन झुल्फों में चुपी हुई ख़्वाहिशें हैं, तुम्हें झपकी देने को बेकरार हैं। इन झुल्फों की महक, मेरे दिल को चूमती हैं, तुम्हारे आगे ये आँखें झूमती हैं। इन झुल्फों की लहर, मेरे ख्वाबों को बहाती हैं, तुम्हें झुमकी पहनाने को बेकरार हैं। ये झुल्फें तेरे चेहरे को सजाती हैं, तुम्हें गले से लगाने को बेकरार हैं। इन झुल्फों में उतरे हुए तारे हैं, तुम्हें चूमने को बेकरार हैं।

क्या बताऊं

 ज़िंदगी की गहराइयों में खोए हुए, अँधेरी रातों के दरमियाँ टूटे हुए। आँखों में आंसू बहाते चले आते हैं, जीवन के दर्द को अविरलता से छाते हैं। बिखरे हुए ख्वाबों की रेखाएँ बनाते हैं, खुद को गुमसुम रातों में खो देते हैं। हर सांस ले रही है दर्द की कहानी, ज़िंदगी के रास्ते में हम खो देते हैं। हंसने की आदत कहीं खो गई है, आँखों में चमकी आशाओं की रौशनी गई है। इस उदास ज़िंदगी का संगीन रंग, हर पल बढ़ते हुए दर्द की भूख में तन गया है। हर दिन खोया हुआ जीने की लड़ाई, खुद को ढांचे से निकालकर चलते हैं। दर्द की चुभती आहटों का संगीत बनाते हैं, आँखों में आंसू की माला सजाते हैं। ये ज़िंदगी है या फिर एक सपना, दर्द और उम्मीद के रंग में खो जाते हैं। जीने की कविता रचते हैं हम, आँखों में आंसू सहकर संघर्ष करते हैं।